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Delhi दिल्ली: राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगातार गंभीर बनी हुई है। बुधवार को कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 353 तक पहुंच गया, जिससे हवा का स्तर 'बहुत खराब' के कैटेगरी में आ गया। यह स्थिति लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत देती है। मौसम विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता का बिगड़ना मुख्य रूप से कम हवा की गति और ठंडे तापमान के कारण हुआ है। ठंडी हवाओं और कम हवा की गति से वायु में मौजूद प्रदूषक कण अपने आप नहीं फैल पा रहे हैं, जिससे धुंध और स्मॉग बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों ने बताया कि राजधानी में वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोतों में वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक धुआं, निर्माण गतिविधियां और आस-पास के राज्यों से आने वाला पराली का धुआं शामिल है। उत्तर-पश्चिमी वायु धाराओं के चलते, पंजाब और हरियाणा में जले हुए पराली के धुएं का असर दिल्ली पर पड़ रहा है। इस वजह से PM2.5 और PM10 जैसे कण प्रदूषण के स्तर अधिक बने हुए हैं, जो श्वसन संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों को बाहर कम से कम निकलना चाहिए, और यदि निकलना आवश्यक हो तो मास्क पहनना अनिवार्य है। साथ ही, लोगों को भारी शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम से परहेज करने की चेतावनी दी गई है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने भी स्थिति पर नजर रखते हुए स्मॉग राहत और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, वाहनों की जांच, औद्योगिक इकाइयों पर नियंत्रण और पेड़-पौधों के संरक्षण जैसी गतिविधियों को बढ़ाया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक ठंडी हवाओं और स्थिर मौसम के कारण AQI का स्तर गंभीर बना रह सकता है। इस समय हवा की गति 2-5 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच है, जो प्रदूषकों को फैलने से रोक रही है। विशेषज्ञों ने कहा कि हवा की गति और तापमान में बदलाव आने पर ही वायु की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को कम करें, जैसे वाहनों का कम इस्तेमाल, कचरे और पराली का जलाना रोकें। इसके अलावा, हवा शुद्ध करने वाले उपकरण और घर में पौधे लगाने से भी प्रदूषण का कुछ हद तक मुकाबला किया जा सकता है। इस तरह की 'बहुत खराब' वायु गुणवत्ता दिल्लीवासियों के लिए स्वास्थ्य संकट का संकेत है, और इसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और नागरिकों दोनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
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